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Bihar Flood News: गंगा-कोसी का कहर, भोजपुर से मुंगेर तक बाढ़ और सहरसा में कटाव से बढ़ी मुश्किलें

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में गंगा और कोसी का जलस्तर लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। भोजपुर में गंगा खतरे के निशान से 43 सेमी ऊपर, मुंगेर में पानी तेजी से बढ़ा और सहरसा में कोसी कटाव से घर नदी में समा रहे हैं।

पटना, 25 अगस्त। बिहार में नदियों का बढ़ता जलस्तर अब कई जिलों में लोगों के लिए गंभीर परेशानी बनता जा रहा है। भोजपुर में गंगा खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, मुंगेर के निचले इलाकों में नदी का पानी तेजी से फैल रहा है, जबकि सहरसा में कोसी का जलस्तर घटने के बावजूद कटाव ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है।

तीनों जिलों की तस्वीर अलग है, लेकिन परेशानी एक जैसी है—कहीं खेत और सड़क पानी में डूबे हैं, कहीं घरों में बाढ़ का पानी पहुंच चुका है और कहीं नदी के कटाव ने लोगों को अपना आशियाना छोड़ने पर मजबूर कर दिया है।

भोजपुर में खतरे के निशान से 43 सेंटीमीटर ऊपर गंगा

भोजपुर के बड़हरा प्रखंड में गंगा का जलस्तर लगातार चिंता बढ़ा रहा है। जल संसाधन विभाग के अनुसार सोमवार शाम छह बजे बड़हरा में गंगा का जलस्तर 53.51 मीटर दर्ज किया गया। यह खतरे के निशान से करीब 43 सेंटीमीटर ऊपर है।

जलस्तर बढ़ने से बड़हरा के कई गांवों के खेत और बधार जलमग्न हो गए हैं। ग्रामीण सड़कों पर भी पानी पहुंच गया है। इससे खेती, पशुपालन और दैनिक आवागमन प्रभावित हुआ है।

मोहन करजा, बड़का लौहर, नेकनाम टोला, बखोरापुर, दुबे छपरा, हाजीपुर, शिवपुर, गुंडी और छोटका ईटहना समेत कई इलाकों में पानी फैलने की जानकारी है।

खेतों में लगी सब्जियां पानी में डूबीं

बाढ़ का सीधा असर किसानों पर पड़ा है। खेतों में लगी लौकी, नेनुआ, छिंगुनी, परवल और मकई समेत कई फसलें पानी की चपेट में आ गई हैं।

किसानों को डर है कि अगर जलस्तर जल्द कम नहीं हुआ तो फसल पूरी तरह बर्बाद हो सकती है। दूसरी ओर बधार में पानी भरने से पशुपालकों के सामने हरे चारे का संकट भी खड़ा हो गया है।

लौहर-दुबे छपरा, लौहर-बखोरापुर और नेकनाम टोला-केशोपुर-सरैंया जैसे ग्रामीण मार्गों पर भी पानी पहुंचने से आवागमन प्रभावित हुआ है।

ग्रामीणों में राहत नहीं मिलने की नाराजगी

बड़हरा के ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में बाढ़ कोई नई समस्या नहीं है। हर साल गंगा का जलस्तर बढ़ने पर लोगों को इसी तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों ने नाव, राहत सामग्री और प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अधिकारी निरीक्षण के लिए आते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर राहत व्यवस्था पर्याप्त नहीं है।

स्थानीय ग्रामीण राजेंद्र पांडे के मुताबिक बाढ़ के कारण करीब 30 से 35 गांव प्रभावित हैं। उन्होंने अधूरे पुल के निर्माण को भी इलाके की परेशानी से जोड़ते हुए जल्द समाधान की मांग की।

बड़हरा में चार मेडिकल टीमें सक्रिय

बाढ़ प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन सतर्क है। बड़हरा में स्वास्थ्य विभाग की चार मेडिकल टीमें काम कर रही हैं।

प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अरविंद कुमार के अनुसार गंभीर मरीजों, गर्भवती महिलाओं और अन्य जरूरतमंद लोगों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या ब्लॉक स्तर के अस्पताल तक पहुंचाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर मेडिकल टीमों की संख्या बढ़ाने की तैयारी भी है।

सहरसा में पानी घटा तो बढ़ गया कटाव का खतरा

भोजपुर के बाद सहरसा में भी नदी का बदलता रूप लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। यहां कोसी का जलस्तर उतार-चढ़ाव के बीच घट रहा है, लेकिन पानी कम होने के साथ कटाव तेज होने की शिकायत सामने आई है।

नवहट्टा प्रखंड की डरहार पंचायत के महादलित टोले में कोसी नदी का कटाव ग्रामीणों के लिए बड़ा खतरा बन गया है।

कई घर नदी में समाए

कटाव की वजह से कई घर नदी में समा चुके हैं, जबकि दर्जनों मकान कटाव के मुहाने पर हैं। जिन परिवारों के घर और जमीन नदी में चली गई, उन्हें अपना सामान लेकर दूसरे लोगों के दरवाजे पर शरण लेनी पड़ रही है।

पीड़ित परिवारों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर उनकी जमीन ही नहीं बची तो दोबारा घर कहां बनाएंगे।

स्थानीय मुखिया राम कुमार ने विस्थापित परिवारों के स्थायी पुनर्वास और जमीन उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों के मुताबिक कटावरोधी काम और पुनर्वास को लेकर कई स्तरों पर आवेदन दिए गए, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकला है।

मुंगेर में खतरे के निशान के करीब पहुंची गंगा

उधर मुंगेर में भी गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार मुंगेर में गंगा का जलस्तर 39.00 मीटर तक पहुंच गया है, जबकि खतरे का निशान 39.33 मीटर है।

यानी नदी का पानी खतरे के निशान से सिर्फ 33 सेंटीमीटर नीचे है।

पिछले 18 घंटे में जलस्तर में करीब 12 सेंटीमीटर की बढ़ोतरी दर्ज होने से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।

कृष्णानगर में करीब 40 घर जलमग्न

हवेली खड़गपुर प्रखंड की तेलियाडीह पंचायत के कृष्णानगर गांव में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है। ग्रामीणों के अनुसार करीब 40 घर पूरी तरह पानी में डूब गए हैं, जबकि कई अन्य मकान भी प्रभावित हैं।

गांव में बड़ी संख्या में मजदूर और पशुपालक परिवार रहते हैं। घरों में पानी भरने के बाद कई परिवार बच्चों और मवेशियों के साथ सुरक्षित जगह की तलाश में सड़क किनारे पहुंच गए हैं।

कुछ परिवार अस्थायी झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं, जबकि कई लोग मुख्य सड़क और आसपास के ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।

घरों की छत पर रहने की मजबूरी

जिन मकानों में पानी ज्यादा भर गया है, वहां रहने वाले कई परिवार घर की छतों पर शरण लिए हुए हैं। जरूरी सामान निकालने के लिए लोगों को पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है।

बाढ़ के कारण बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हुई है।

स्थानीय लोगों ने नाव, भोजन, पीने का पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है।

गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा चिंता

बाढ़ के बीच गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों की परेशानी बढ़ गई है। स्थानीय महिला मुन्नी कुमारी ने बताया कि घर के आसपास पानी भर जाने के कारण अस्पताल तक पहुंचना मुश्किल हो सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि किसी मरीज या गर्भवती महिला को अचानक चिकित्सा सहायता की जरूरत पड़े तो तत्काल अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन जाएगा।

सैकड़ों एकड़ धान की फसल पानी में डूबी

गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर खेती पर भी दिखाई दे रहा है। कृष्णानगर से सटे बहियार में सैकड़ों एकड़ में लगी धान की फसल पानी में डूबने की बात सामने आई है।

गंगा पार दियारा क्षेत्र के सीताचरण, टीकारामपुर और कुतलुपुर के निचले इलाकों में भी पानी फैल रहा है।

दियारा क्षेत्र की करीब तीन पंचायतों के कई टोले पानी से घिरने लगे हैं। पशुपालक अपने मवेशियों को लेकर ऊंचे स्थानों और मुख्य सड़कों की ओर जाने लगे हैं।

मुंगेर प्रशासन अलर्ट मोड में

बाढ़ और संभावित कटाव की स्थिति को देखते हुए मुंगेर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। जिलाधिकारी निखिल धनराज निप्पाणीकर ने संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए हैं।

अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया है।

अंचल अधिकारियों को क्षेत्र में भ्रमण करते रहने तथा नदी के जलस्तर और कटाव पर नजर बनाए रखने का निर्देश दिया गया है।

प्रशासन ने अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट रहने और बिना अनुमति मुख्यालय नहीं छोड़ने को कहा है।

बाढ़ से बड़ा सवाल: राहत के बाद स्थायी समाधान कब?

बिहार में बाढ़ हर साल लौटती है, लेकिन प्रभावित इलाकों के लोगों की समस्याएं भी लगभग वही रहती हैं। कहीं खेत डूबते हैं, कहीं सड़कें कट जाती हैं और कहीं नदी का कटाव लोगों को घर छोड़ने पर मजबूर कर देता है।

भोजपुर के ग्रामीणों की नाव और राहत की मांग हो या सहरसा के विस्थापित परिवारों की जमीन और पुनर्वास की जरूरत—हर जगह तत्काल राहत के साथ स्थायी समाधान की मांग उठ रही है।

मुंगेर में बढ़ता जलस्तर एक बार फिर यही सवाल खड़ा कर रहा है कि यदि नदी का पानी और बढ़ा तो निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को सुरक्षित निकालने की तैयारी कितनी मजबूत है।

बाढ़ से निपटने के लिए केवल जलस्तर पर नजर रखना पर्याप्त नहीं होगा। समय पर नाव, भोजन, साफ पानी, दवा, मेडिकल टीम और सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था के साथ-साथ कटाव प्रभावित परिवारों के स्थायी पुनर्वास पर भी ठोस काम जरूरी है।

आपात स्थिति में मुंगेर में इन नंबरों पर संपर्क

जिला आपातकालीन संचालन केंद्र, मुंगेर

06344-299961

06344-299963

06344-299964

06344-299965

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